🌻🙌🌻 सूर्योदय से संध्या पर्यंत तीज का पूजा🌻🌼🌻 भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहारों का विशेष महत्व है, और इन्हीं में से एक है प्रमुख तीज का व्रत। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और मिलन का प्रतीक है।
भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य प्रेम की अमर गाथा से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने अन्न-जल त्याग कर हिमालय पर कई वर्षों तक निर्जला व्रत रखा। उनके इस कठिन तप से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। कहा जाता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन हुआ था।
यह कथा सुहागिन महिलाओं को अपने पति के प्रति अगाध प्रेम और निष्ठा रखने की प्रेरणा देती है। इसी श्रद्धा के साथ महिलाएं माता पार्वती की तरह ही अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। तीज पर्व केवल एक व्रत नहीं, बल्कि समर्पण, त्याग और प्रेम का प्रतीक है, जो भारतीय नारी की शक्ति और आस्था को दर्शाता है।
माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर जंगल में कठिन तपस्या की थी। हरतालिका का अर्थ: 'हरत' यानी हरण करना (अपहरण) और 'आलिका' यानी सखी। माता पार्वती की सखियों ने उनके पिता की इच्छा के विरुद्ध उन्हें घने जंगल में छिपा लिया था, जिससे इस व्रत का नाम 'हरतालिका' पड़ा। अखंड सौभाग्य इस हरतालिका तीज निर्जला व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य और सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। पुराणों में पूजन विधिबालू या मिट्टी की प्रतिमा इस दिन पवित्र मिट्टी या बालू (रेत) से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। षोडशोपचार पूजन चौकी सजाकर कलश स्थापना की जाती है। इसके बाद विधि-विधान से माता पार्वती को सुहाग की समस्त सामग्री (साड़ी, साया,ब्लाउज,बिंदी, चूड़ी, सिंदूर,अलता, कंधी, आईना,महावर, ईत्र आदि) अर्पित की जाती है।
भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र, धतूरा, मदार (अकवन) के फूल, शम्मी पत्र, अपराजिता पुष्प, वेली,चमेली,भांग भिन्न भिन्न रंग के अबीर,गुलाल,और भस्म अर्पित की जाती है। इस व्रत में रात्रि के समय जागकर भजन-कीर्तन करने और तीनों पहर भगवान शिव-पार्वती की पूजा का विशेष विधान है।
🌻🌼🌻आध्यात्मिक गुरु पं कमला पति त्रिपाठी प्रमोद 🌻🌼🌻